समय यूँही चला जाता है और हम देखते रह जाते हैं, वैसे ही जैसे मुट्ठी मे भरी रेत………
कितनी ही कोशिश करे कोई, कितना ही कस के पकड़े… धीरे धीरे हाथ ख़ाली रह जाता है…इसी रेत की तरह है... More > वक़्त…
लम्हों को कितना ही रोकना चाहो,
यादों को कितनाही सहेजना चाहो…
कुछ हाथ नहीं आता……
रह जातें हैं तो बस
कुछ ख्वाब बिखरे से..< Less