कृति और  विश्व कृति

कृति और विश्व कृति

ByLava kush Singh

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कृति कृति का अर्थ होता है - किया हुआ कार्य, क्रिया, निर्मिति, कोई बहुत प्रशंसनीय कार्य, किसी के द्वारा किया गया लेखन या चित्रांकन आदि रचनात्मक कार्य, रचना, बौद्धिक संपत्ति। कृतिकार का अर्थ होता है - साहित्यिक या कलात्मक कृति का रचयिता, रचना करने वाला व्यक्ति, रचनाकार, लेखक। कृतित्व का अर्थ होता है - किसी लेखक आदि के द्वारा किया गया रचनात्मक कार्य, किसी रचनाकार की समस्त कृतियाँ, कारयित्री प्रतिभा, कारनामा। इस कृति चक्र श्रृंखला में विश्वमन से सभी निर्मित हो रहें हैं और अपने काल-समय के अनुसार अपने कृतित्व द्वारा पूर्णमानव-विश्वमानव निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए सदैव कृतिकार अपना योगदान देते रहें हैं। जब व्यक्ति निर्माण के लिए कृतित्व होता है तो उसे व्यष्टि कृति कहते हैं जबकि वैश्विक व्यक्ति निर्माण के लिए कृतित्व होता है तो उसे समष्टि कृति कहते है इस पुस्तिका में कृति से विश्व कृति की ओर कृति चक्र को प्रस्तुत किया गया है। विषय- सूची कृति भाग-1 : कृति चक्र पं0 मदन मोहन मालवीय - ”काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (वाराणसी)“ पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य - ”अखिल विश्व गायत्री परिवार (ऋृषिकेश)“ नानाजी देशमुख - ”दीनदयाल शोध संस्थान (चित्रकूट)“ महर्षि महेश योगी - ”महर्षि यूनिवर्सिटी आफ मैनेजमेन्ट (हालैण्ड) “ जगद्गुरु रामभद्राचार्य - ”जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय (चित्रकूट)“ भाग-2: अन्तिम विश्व कृति के विचार एक विश्व - श्रेष्ठ विश्व के निर्माण के विचार एक भारत - श्रेष्ठ भारत के निर्माण के विचार एक नागरिक - श्रेष्ठ नागरिक के निर्माण के विचार भाग-3: विश्व कृति लव कुश सिंह “विश्वमानव” सत्यकाशी ब्रह्माण्डीय एकात्म विज्ञान विश्वविद्यालय (Satyakashi Universal Integration Science University-SUISU) भाग-4: अन्तिम विश्व कृति होने का प्रमाण एक विश्व - श्रेष्ठ विश्व के निर्माण के लिए आवश्यक कार्य विश्वव्यापी स्थापना का स्पष्ट मार्ग एक भारत - श्रेष्ठ भारत के निर्माण के लिए आवश्यक कार्य एक नागरिक - श्रेष्ठ नागरिक के निर्माण के लिए आवश्यक कार्य राष्ट्रीय सहजीवन आन्दोलन स्वराज-सुराज आन्दोलन “सत्य मानक शिक्षा” प्रणाली सत्य मानक शिक्षा का व्यापार-पुनर्निर्माण (RENEW - Real Education National Express Way) भाग-5 : समष्टि धर्म दृष्टि अनिर्वचनीय कल्कि महाअवतार भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” का मानवों के नाम खुला चुनौती पत्र अनिर्वचनीय कल्कि महाअवतार का काशी-सत्यकाशी क्षेत्र से विश्व शान्ति का अन्तिम सत्य-सन्देश

Details

Publication Date
Feb 26, 2024
Language
Hindi
Category
Religion & Spirituality
Copyright
All Rights Reserved - Standard Copyright License
Contributors
By (author): Lava kush Singh

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EPUB

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