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संग्रह - मेरी यादों का

ByShivdutt Shrotriya

अब कोई नहीं होगा सुना है कि तुम जा रही हो, अब सामने नजरों के मेरे कोई नहीं होगा हर दिन जो तुम्हें देखा करता था पर लगता है वैसा नजारा अब कोई नहीं होगा|| क्योंकि सुना है कि तुम जा रही हो... कभी नज़र उठा कर देखा करते थे तो कभी नज़र झुका कर छिप जाते थे अचानक लगता था कि जैसे सारे नज़ारे एकदम रुक जाते थे || पर लगता था कि ऐसा खेल अब कोई नहीं होगा क्योंकि सुना है कि तुम जा रही हो..

Details

Publication Date
Jul 3, 2017
Language
Hindi
ISBN
9788193348246
Category
Fiction
Copyright
All Rights Reserved - Standard Copyright License
Contributors
By (author): Shivdutt Shrotriya

Specifications

Format
PDF

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