Bachpan
Ek Gunaah ki Dastak
ParManoj Wadkar
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"बचपन" एक ऐसा पर्व जिसे हर कोई अपनी जिंदगी मे जीता है. "बचपन" एक ऐसा पर्व जिसमे हर किसी के भविष्य की निव रखी जाती है. इसलिये हमारे घर के बच्चों के बचपन का खयाल रखने की प्रमुख जिम्मेदारी उनके माता पिता की होती है. बचपन मे बच्चों के आसपास घटित होने वाली हर घटना का प्रत्यक्षरूप से असर बच्चों के जिंदगी पर पडता रहता है. अगर अच्छी घटनाए घटित हो तो उसका अच्छा असर और अगर बुरी घटनाए घटित हो तो उसका बुरा असर बच्चों के जिंदगी पर पडता दिखाई देता है. इसलिये अपने बच्चों के आसपास घटित हो रही घटना ओंकी जानकारी रखना हर माता पिता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन जाती है… साथ ही अपने बच्चों को अच्छे माहोल मे रखने की जिम्मेदारी भी उनके माता पिता की हो जाती है.
बच्चों का अच्छा भविष्य निर्मित करने मे सबसे बडी भुमिका बच्चों को उनके माता पिता के द्वारा दिये गये संस्कारों की होती है और अगर इस काम मे माता पिता से चूक हो जाये तो उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है. मैने अपने इस किताब से यही बात समझाने का प्रयास किया है. हम बहोत बार अपने बच्चों की गलतियों को छोटा समझकर नजर अंदाज कर देते है या फिर कही बार बच्चों के दिल की बात समझने मे असमर्थ रहते है….पर अक्सर यही छोटी गलतिया भविष्य मे बडा स्वरूप लेकर हमारे बच्चों की जिंदगी को उजाड कर रख देती है. इसलिये बच्चों के हर छोटी गलती को समझकर गंभीरता से लेते हुए उसका प्रेम से निदान करने की कोशिश हर माता पिता को करनी चाहिये.
इन्ही सारे महत्वपूर्ण बातों को मध्य नजर रखते हुए एक उदाहरण की तौर पर इस किताब को लिखा गया है मेरे आसपास घटित हो रही सत्य घटना ओंसे प्रेरित होकर मैने यह किताब लिखी है. आपके इस किताब को पढने के बाद आप भी इस बात को महसूस करोगे के आप के आसपास के समाज मे भी इस किताब की तरह की घटनाए घटित होती है.
हर माता पिता का अपने बच्चों के बचपन मे जागरूक रहना बेहद जरुरी होता है. हमारे मे से या हमारे आसपास के कही सारे माता पिता ऐसे होते है जो अपने बच्चों को अपने इच्छा-आकांक्षा ओंके साथ बडा बनाने की कोशिश मे जुटे रहते है और इसलिये वो अपने बच्चों को अपने इच्छापूर्ती के स्वार्थ के दबाव तले दबाना शुरु कर देते है. इस बीच वों अपने ही बच्चों के इच्छा ओंका का खयाल रखना भूल जाते है और यही से बच्चों के खराब भविष्य की शुरुवात होनी शुरु हो जाती है.
यह बहोत ही गलत बात है. जिस तरह हाथ की हर उंगली एक समान नहीं होती, ठिक उसी प्रकार हर बच्चे की प्रतिभा एक समान नहीं होती. अपने इच्छा ओंके के अनुसार अपने बच्चों को बडा इन्सान बनाने की कोशिश करने के बजाय अपने बच्चों की प्रतिभा को समझकर उस प्रतिभा के अनुसार बच्चों को बडा बनाने का प्रयास करना ही हर माता पिता का प्रथम कर्तव्य होता है. पर अक्सर लोग इस बात को भूल जाते है..
कशा कर ता हूँ के आप सब को यह 'किताब पसंद आयेगी.
Détails
- Date de publication
- Sep 6, 2021
- Langue
- Hindi
- Catégorie
- Fiction
- Copyright
- Tous droits réservés - Licence de copyright standard
- Contributeurs
- Par (auteur): Manoj Wadkar
Caractéristiques
- Format
- EPUB