Gullu Ka Gaon

Gullu Ka Gaon

ByDr. Pradeep Shukla

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आओ तुम्हे ले चलें, गुल्लू के गाँव घुसते ही मिलेगी, पीपल की छाँव दो ताल बड़े बड़े, एक है तलैय्या लो जी ये आ गई, गुल्लू की गईय्या सड़क से गाँव तक, बिछा है खडंजा कट गए पेंड़, हुआ टीला अब गंजा गाँव में बैलों की, बचीं दो जोड़ी किस्सों में मिलेगी अब लिल्ली घोड़ी सूख गये कुँए सब, चला गया पानी कुँए में मेढक की, बची बस कहानी गुल्लू के कई दोस्त, गए हैं कमाने छोड़ दी पढ़ाई क्यों, गुल्लू न जाने गुल्लू के गाँव में, बिजली के खम्भे गुल्लू के सपने हैं, गुल्लू से लम्बे पढ़ता है खुद गुल्लू, सबको पढ़ाता काका को अखबार, पढ़ कर सुनाता पहन लो जूते, नहीं चलो नंगे पाँव अभी बहुत बाक़ी है, गुल्लू का गाँव.

Details

Publication Date
Jan 20, 2016
Language
Hindi
Category
Poetry
Copyright
All Rights Reserved - Standard Copyright License
Contributors
By (author): Dr. Pradeep Shukla

Specifications

Format
EPUB

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